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हैप्पी कार्ड योजना बन गई सरकार के लिए सिरदर्द, अशोक खेमका ने लगाया था 180 करोड रुपए के नुकसान का आरोप

Satyakhabarindia

हरियाणा अंत्योदय परिवार परिवहन योजना (हैप्पी कार्ड योजना) अब हरियाणा सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है। परिवहन मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से इस योजना में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश देने का आग्रह किया है। यह कदम तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन विभाग) अशोक खेमका द्वारा दिसंबर 2024 में योजना में कई अनियमितताओं को उजागर करने के बाद उठाया गया है।

बता दें कि यह वही अशोक खेमका हैं जिन्होंने रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच हुई करोड़ों की जमीन डील को रद्द किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, हैप्पी कार्ड योजना को मार्च 2024 में शुरू किया गया था। इसके तहत सालाना एक लाख रुपये तक आय वाले परिवारों को हर साल 1,000 किलोमीटर तक मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी जानी थी। सरकार का अनुमान था कि लगभग 84 लाख लोग इस योजना से लाभान्वित होंगे। हालांकि, इस योजना के कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों ने इसे विवादों में घेर लिया है।

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हैप्पी कार्ड योजना बन गई सरकार के लिए सिरदर्द, अशोक खेमका ने लगाया था 180 करोड रुपए के नुकसान का आरोप

दिसंबर 2024 में, अशोक खेमका ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस योजना को बिना प्रतिस्पर्धी बोली (कॉम्पिटिटिव बिडिंग) के मंजूरी दी गई थी, जिसके कारण सरकार को अनुमानित 180 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि मुंबई की कंपनी औरियनप्रो को प्रति कार्ड 159.30 रुपये का भुगतान करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया, जिसमें पहले 10 लाख कार्ड मुफ्त थे और कंपनी को न्यूनतम 50 लाख कार्ड की गारंटी दी गई थी। इसके अलावा, दूसरे वर्ष से प्रत्येक कार्ड के लिए 79.06 रुपये का वार्षिक रखरखाव शुल्क भी निर्धारित किया गया, जबकि लाभार्थियों से केवल 50 रुपये का शुल्क लिया गया।

खेमका ने बताया कि 50 लाख कार्ड के लिए प्रारंभिक चरण में 63.72 करोड़ रुपये (पहले 10 लाख मुफ्त कार्ड को छोड़कर) और दूसरे वर्ष से 39.53 करोड़ रुपये का वार्षिक रखरखाव खर्च होगा। उन्होंने इस रखरखाव शुल्क को अत्यधिक बताया और कहा कि कार्ड के लिए न्यूनतम सेवा की आवश्यकता होती है, इसलिए यह शुल्क “नहीं देना चाहिए।”

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खेमका ने लिखा कि परियोजना पर तत्कालीन मुख्यमंत्री से दो बार मंजूरी ली गई और कार्ड की लागत तय होने के केवल 19 दिन बाद ही योजना शुरू कर दी गई। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भारतीय स्टेट बैंक का एनसीएमसी कार्ड केवल 100 रुपये (जीएसटी सहित) में उपलब्ध है और इसमें कोई रखरखाव शुल्क नहीं है। खेमका ने तत्कालीन प्रधान सचिव (मुख्यमंत्री) वी. उमाशंकर से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या 8 और 28 फरवरी 2024 को मंजूरी देने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री को बाजार मूल्य की सही जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा, “एक गलत निर्णय के कारण अनुमानित 180 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।” उन्होंने यह भी कहा कि उमाशंकर के जवाब के बाद “घोटाले की सच्चाई” सामने आएगी।

परिवहन मंत्री अनिल विज ने इसे “बेहद गंभीर मामला” बताते हुए एक जांच समिति गठित करने का सुझाव दिया, जिसकी प्रमुख एसीएस (गृह) सुमिता मिश्रा होंगी और इसमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने इस कॉन्ट्रैक्ट के आवंटन में उचित प्रक्रिया का पालन होने की जांच के लिए एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी।

प्रशासनिक बदलाव और जांच में देरी

30 अप्रैल 2025 को अशोक खेमका के सेवानिवृत्त होने के बाद, टीएल सत्यप्रकाश ने 8 मई को परिवहन विभाग के आयुक्त और सचिव का पदभार संभाला। 14 मई को, प्रधान सचिव (मुख्यमंत्री) अरुण गुप्ता ने लिखा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सत्यप्रकाश से इस मामले की गहन जांच करने को कहा है। हालांकि, चार महीने बाद सत्यप्रकाश का तबादला हो गया और 6 सितंबर को एसीएस राजा शेखर वुंद्रू ने परिवहन विभाग का कार्यभार संभाला। वुंद्रू ने कहा कि वह इस मामले से अवगत नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अभी जॉइन किया है।

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4 अगस्त को, विज ने फिर से इस मुद्दे को उठाया और शिकायत की कि परिवहन विभाग के आयुक्त और सचिव से टिप्पणी मांगने के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष या सिफारिश नहीं मिली। उन्होंने कार्ड की लागत तय करने में शामिल अधिकारियों और बैठकों के विवरण की मांग की और पूछा कि क्या यह मामला मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया था।

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